नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वह मतदान का बूथ वार डाटा (फॉर्म 17 सी) अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध कराने पर विचार करने के लिए तैयार है। चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने कहा, नए मुख्य चुनाव आयुक्त ने कार्यभार संभाला है और याचिकाकर्ता अपने अभ्यावेदन के साथ उनसे मिल सकते हैं, जिस पर विचार किया जाएगा।
निर्वाचन आयोग की ओर से इस मांग पर विचार करने की बात का संज्ञान लेते हुए सीजेआई जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने याचिकाकर्ताओं को अपनी मांग लेकर 10 दिनों के अंदर आयोग से संपर्क करने के लिए कहा। गैर सरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स और कॉमन कॉज तथा अन्य ने मतदान के बूथवार आंकड़े से संबंधित फॉर्म 17 सी को सार्वजनिक करने की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
वोटों की संख्या और मतदान के बीच विसंगतियां
गैर सरकारी संगठनों की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दलील दी कि ईवीएम की गणना के अनुसार वोटों की संख्या और वास्तविक मतदान के बीच विसंगतियां हैं। उन्होंने पूछा कि क्या नागरिकों को यह बुनियादी आंकड़ा जानने का अधिकार नहीं है। एक अन्य याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि चुनाव आयोग को अंतिम सूची में विसंगति के बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए। पीठ ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे चुनाव आयोग से संपर्क करें। पीठ ने कहा, याचिकाकर्ताओं ने एक बड़ा मुद्दा उठाया है। हालांकि उम्मीदवारों को यह जानकारी मिलती है।
आयोग ने कहा था, फैलाई जा सकती हैं अफवाहें
अपने हलफनामे में चुनाव आयोग ने मई, 2024 में सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वेबसाइट पर फॉर्म 17सी अपलोड करने से गड़बड़ी हो सकती है और इन तस्वीरों से छेड़छाड़ कर मतदान के बारे में अफवाहें फैलाई जा सकती हैं। इससे चुनाव की पवित्रता को लेकर अविश्वास पैदा हो सकता है। आयोग ने यह भी दावा किया था कि अंतिम मतदान डेटा में 5 से 6 फीसदी की वृद्धि के संबंध में आरोप भ्रामक और निराधार थे। चुनाव आयोग ने कहा था कि फॉर्म 17 सी का संपूर्ण खुलासा पूरे चुनावी क्षेत्र को दूषित कर देगा।
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