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सूचना नहीं देना जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को पड़ा महंगा स

मुंगराबादशाहपुर (जौनपुर) । जनसूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई सूचना नहीं देना जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को तब मँहगा पड़ गया जब पीड़ति की सुनवाई करते हुए जन सूचना उपलब्ध नहीं कराने का दोषी ठहराते हुए सूचना आयुक्त ने जिला

बेसिक शिक्षा अधिकारी पर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाते हुए उसकी वसूली करने हेतु प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा निदेशक बेसिक शिक्षा निदेशालय के साथ ही जिलाधिकारी जौनपुर को पत्र भेजकर कार्यवाही करते हुए तीन माह के अंदर अनुपालन आख्या भेजने का निर्देश दिया है। मिली जानकारी के अनुसार मुंगराबादशाहपुर विकास खण्ड के प्राथमिक विद्यालय हलऊ का पूरा में नियुक्त शिक्षामित्र हिमकर पाण्डेय ने जन सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से कुछ विन्दुओ पर सूचना मांगी थी। जिसे समय सीमा समाप्त होने के बाद भी नहीं दिए जाने पर हिमकर पाण्डेय ने अपीलीय अधिकारी उपनिदेशक बेसिक शिक्षा वाराणसी मंडल को भेजकर सूचना दिलाने की अपील की लेकिन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जौनपुर कार्यालय द्वारा कोई सूचना नहीं दी गई। जिसके विरुद्ध हिमकर पाण्डेय ने सूचना आयोग उत्तर प्रदेश में अपील संख्या एस 5866 2018 पंजीकरण संख्या 82757 पर अपील दायर कर दिया जिसकी सुनवाई करते हुए मा० सूचना आयुक्त अजय कुमार उप्रेती ने 4 मार्च 2022 को जनसूचना अधिकारी को आवेदक को सूचना उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। लेकिन लम्बा समय बीत जाने के बाद भी जनसूचना अधिकारी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जौनपुर द्वारा आवेदक को सूचना नहीं दी गई। लगभग चार साल तक जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई सूचना अधर में लटकती रही तथा सूचना आयुक्त के आदेश को चुनौती दी जाती रही। जिसके कारण सूचना आयुक्त मा० अजय कुमार उप्रेती ने जन सूचना अधिकार अधिनियम की अवहेलना करने का दोषी करार देते हुए दिनांक 04 मार्च 2022 में पदस्थ जन सूचना अधिकारी कार्यालय जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जौनपुर पर 250 रूपए प्रतिदिन के हिसाब से 25,000 रूपए का अर्थ दण्ड लगाते हुए उनके वेतन से अर्थदंड की वसूली करने का निर्देश जारी किया मा० सूचना आयुक्त अजय कुमार उप्रेती ने आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा, निदेशक बेसिक शिक्षा शिक्षा निदेशालय के साथ ही जिलाधिकारी जौनपुर को पत्र लिखा हैं। फिलहाल जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को जन सूचना अधिकार अधिनियम का अनुपालन नहीं करना महंगा पड़ गया। जिसे लेकर बेसिक शिक्षा विभाग में तरह तरह की चर्चाएं शुरू हो गई है।


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