कल्याण सिंह जी के जनकल्याणकारी योजनाओं में से एक शिक्षामित्र योजना थी जिसमें गांव के सबसे अधिक अंक पाने वाले युवाओं का चयन लगभग 18वर्ष से 30 वर्ष के बीच के युवाओं का हुआ था और यह युवावर्ग इस उद्देश्य के साथ इसमें लगा था कि हमारा भविष्य उज्जवल होगा लेकिन इस योजना में शामिल होने वाले युवाओं का पूरा जीवन बर्वाद हो गया।
गांव के सबसे अधिक मेरिट से चयनित होने वाले युवाओं की आगे की शिक्षा ब्रेक हो गयी और केवल प्राईमरी के बच्चों को पढ़ाते पढ़ाते उनकी जानकारी का ज्ञान भी कक्षा 1से 5तक की किताबो तक सीमित रह गया।
बसपा/ सपा सरकार में स्नातक पास शिक्षामित्रों को अन्ट्रेड टीचर मानते हुए एनसीटीई से अनुमति लेकर सेवारत दूरस्थ बीटीसी का प्रशिक्षण कराया गया और प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इनकी स्थिति ट्रेंड टीचर/प्रशिक्षित स्नातक शिक्षामित्र की हो गई थी लेकिन सपा सरकार द्वारा उसी पद पर नियमित न करके सहायक अध्यापक के पद पर नयी नियुक्ति कर दी जिससे समायोजन निरस्त हो गया और माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में लिखा है कि दो भर्तियों में शामिल होने के लिए वेटेज एवं आयु में छूट देते हुए राज्य सरकार इनको समायोजन से पूर्व की स्थिति में रखे।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय अपने आदेश में शिक्षामित्रों की दो कटेगरी राज्य सरकार व एनसीटीई के जबाव के अनुसार निर्धारित किया है पहला 124000 अप्रशिक्षित स्नातक शिक्षामित्र एवं 46000 इंटरमीडिएट शिक्षामित्र।
जब माननीय सर्वोच्च न्यायालय अपने आदेश में लिखा है कि समायोजन से पूर्व की स्थिति में सरकार रख सकती है तो राज्य सरकार किस आधार पर सभी शिक्षामित्रों को एक केटेगरी में रखते हुए शिक्षामित्र बना दिया।
बीजेपी सरकार आज कल्याण सिंह जी के अंतिम संस्कार में शामिल होकर सच्ची श्रद्धांजलि देते हुए बचन लेना चाहिए कि कल्याण सिंह जी के द्वारा जारी किए गए जनकल्याणकारी योजनाओं में शामिल शिक्षामित्रों को समायोजन से पूर्व की स्थिति ट्रेंड टीचर/प्रशिक्षित स्नातक शिक्षामित्र के पद पर रखते हुए उनका मान सम्मान वापस करने का संकल्प लेकर उसे अतिशीघ्र पूरा करने की घोषणा करनी चाहिए तभी स्वर्गीय कल्याण सिंह जी को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित हो सकती है ।।
गुरू चरन ,जिला बस्ती — feeling sad with Radhey Shyam Sharma and 10 others in Uttar Pradesh.
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