प्रयागराज : पहले दो साल नियुक्ति पाने में लग गए, और जब शिक्षक बने तो अब प्राथमिक स्कूल नहीं मिल रहा है। यही पीड़ा लेकर नवनियुक्त शिक्षक बड़ी संख्या में बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में हाजिरी दे रहे हैं और हर दिन स्कूल आवंटन के आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सबसे विकट समस्या उन शिक्षकों के सामने है जो दूसरे जिले के रहने वाले हैं। स्कूल न मिलने से वे किराए के आवास आदि का प्रबंध भी नहीं कर पा रहे हैं। विभाग इस संबंध में कुछ भी स्पष्ट नहीं कर रहा, केवल आश्वासन दिया जा रहा है कि आदेश जल्द होगा।
बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों की 69,000 शिक्षक भर्ती का शासनादेश पांच दिसंबर 2018 को जारी हुआ था। ठीक दो बरस बाद पांच दिसंबर 2020 को भर्ती के दूसरे चरण में 36,590 चयनितों को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए थे। इसकी शुरुआत मुख्यमंत्री ने की और फिर जिलों में जनप्रतिनिधियों ने नियुक्ति पत्र वितरित किए। पहले नवनियुक्त शिक्षकों की हाजिरी को लेकर असमंजस रहा, फिर उन्हें बीएसए कार्यालय में हाजिरी लगाने का आदेश हुआ। तब से शिक्षक बीएसए कार्यालय पहुंच रहे हैं। इस अब एक माह हो गया है। अब तक स्कूल आवंटन की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है।
वेतन न मिलने से भी परेशानी : शिक्षक भर्ती में दूसरे चरण वालों को स्कूल नहीं मिला है, जबकि पहले चरण में स्कूल पा चुके शिक्षकों को वेतन नहीं मिल पा रहा है। कुछ जिलों में जरूर तेजी दिखाई है, लेकिन अधिकांश में सत्यापन पूरा होने का नाम नहीं ले रहा है। इसमें सुदूर जिलों के शिक्षक खास तौर पर आर्थिक संकट से परेशान हैं।
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